बीजेपी शासित इस राज्य के सीएम ने राकेश टिकैत को बताया फ्रस्ट्रेटड नेता

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून और उसका विरोध कर रहे किसान आंदोलन को लेकर देश में सियासत चरम पर है। राजनीतिक पार्टियों इस मामले को लेकर लगातार सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी पर धावा बोल रही है। किसान पिछले 75 दिनों से दिल्ली के बॉर्डरों पर इस कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। अभी तक 150 से ज्यादा किसानों की मौत भी हो चुकी है।

दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे ज्यादातर किसान हरियाणा, पंजाब और यूपी के है। वहीं, दूसरी ओर किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं की ओर से भी लगातार बयानबाजियां जारी है। पिछले दिनों बीजेपी नेताओं ने तो आंदोलन कर रहे किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी तक बता दिया था। इसी बीच बीजेपी शासित हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का बयान सामने आया है। उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत को फ्रस्ट्रेटेड नेता करार दिया है।

हरियाणा के सीएम का पूरा बयान

बीते दिन मंगलवार को चंडीडढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा, पीएम मोदी ने जिस तरह से कहा है कि किसानों के हित के लिए कानून बनाए गए हैं। उस पर सभी को ध्यान से समझबूझ कर बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा ‘पीएम की बातों पर विश्वास करना चाहिए लेकिन कुछ फ्रस्ट्रेटेड नेता है जिनकी मंशा कुछ और ही है इसलिए वो किसानों के हित की बात नहीं कर रहे हैं।‘

खट्टर ने आगे कहा कि ऐसे नेताओं के निजी स्वार्थ है इसलिए वो अपने हितों को साधने के लिए किसानों को आगे करके चल रहे‌ हैं। गुरनाम सिंह चढूनी हों या फिर राकेश टिकैत दोनों के अपने-अपने निजी हित हैं जिसकी वजह से वो किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

सीएम ने मीडिया से कहा कि ‘अगर राकेश टिकैत को समझाना ही है तो वह उत्तर प्रदेश के किसानों को समझाएं। हरियाणा में किसान बहुत खुशहाल है। बस सिर्फ कुछ लोग ही बहकावे में बने हुए हैं और हम उनको भी जल्द ही समझा कर संतुष्ट करेंगे. किसानों के लिए हरियाणा में कोई कठिनाई नहीं है।‘

आंदोलन के केंद्र बन गए हैं राकेश टिकैत

बता दें, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन लगभग खत्म ही हो चला था। लेकिन भारतीय किसान यूनियन के नेता और प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में जान डाल दी और अब राकेश टिकैत आंदोलन के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने सरकार से एमएसपी पर कानून बनाने और नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे दिल्ली के बॉर्डरो पर 2 अक्टूबर तक आंदोलन करेंगे और अगर सरकार तब भी उनकी मांगे पूरी नहीं करती है तो यह आंदोलन पूरे देश में जाएगा।

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