भारतीय टीम में शामिल होने से पहले पाकिस्तान के लिए खेले थे सचिन

मास्टर ब्लास्टर और क्रिकेट के भगवान के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट के प्रति दीवानगी और पागलपन इतना था कि उन्होंने महज 16 साल की उम्र में ही अंतरास्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया. बचपन में मात्र एक ही जर्सी थी सचिन के पास . जिसे वो पहनकर हर रोज क्रिकेट खेला करते थे और इसीलिए खेलने के बाद हर शाम उस जर्सी को सचिन साफ करते ताकि पसीने की गंध की वजह से उन्हें औरों के सामने शर्मिंदगी महसूस ना करना पड़े.

क्रिकेट के प्रति इतना शौक और जुनून ने ही सचिन को दुनिया के महानतम बल्लेबाजों की श्रेणी में शिर्ष पर लाकर खड़ा कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 16 साल की उम्र में अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू करने वाले सचिन भारत से पहले हमेशा भारत का चिर प्रतिद्वंद्वी रहा पाकिस्तान के लिए खेल चुके हैं. जी हाँ, ये कोई हवा हवाई वाली बात नहीं है बल्कि सोलह आने सच्ची बात है. जिसे सचिन ने खुद खुलासा किया.

2014 में सचिन ने अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग ईट माई वे’ में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 20 जनवरी 1987 को क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के 50 साल (गोल्डन जुबली) पूरे होने पर मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रदर्शनी मैच रखा गया था. यह पांच मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले 40-40 ओवर का एक मैच था. जब मैच का आखिरी घंटा चल रहा था, तब पाकिस्तान के दो सीनियर खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर रेस्ट करने होटल चले गए. पाकिस्तान के कप्तान इमरान ख़ान CCI के कप्तान हेमंत केंकरे के पास गए और कहा कि उनके पास फील्डर कम हैं. उन्हें तीन-चार खिलाड़ियों की ज़रूरत है. दो लड़के आसपास ही टहल रहे थे. सचिन तेंडुलकर और खुशरू वसानिया. सचिन ने हेमंत की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखा और मराठी में पूछा, “मी जाऊ का?” जिसका हिंदी मतलब होता है मैं जाऊं क्या ?

इससे पहले कि सीसीआई के कप्तान हेमंत केंकरे हाँ बोलते , सचिन पाकिस्तान की तरफ से फील्डिंग करने के लिए मैदान में थे. अगले 25 मिनट तक उन्होंने पाकिस्तान के लिए फील्डिंग की. ऐसे मे सचिन को मात्र 14 साल की उम्र में क्रिकेट के दिगज्जों मैदान साझा करने मौका मिल गया.

उस मैच में फील्डिंग करते हुए एक वक़्त ऐसा भी आया जब सचिन कपिल देव का कैच ले सकते थे. लेकिन, सचिन से वो कैच छुट गयी. बाद में उन्होंने अपने दोस्त के पास निराशा जताते हुए कहा कि उन्हें कपिल कैच पकड़ लेना चाहिए था.

सचिन ने अपनी किताब में लिखा कि मैंने एक दोस्त से शिकायत की थी कि अगर मुझे लॉन्ग ऑन की जगह मिड ऑन पर फील्डिंग कराई जाती, तो शायद उनके पास एक कैच पकड़ने का मौका होता. सचिन ने किताब में लिखा- “मुझे नहीं पता कि इमरान खान को ये याद भी होगा या नहीं कि मैंने एक बार पाकिस्तानी टीम के लिए फील्डिंग की है.”

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