प्रधानमंत्री बनने के बाद लोन पर खरीदी थी कार, जानिए लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े कुछ अनोखे किस्से


शालीनता और सौम्यता की मूरत देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज पुण्यतिथि है। उन्हें जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु के बाद देश की बागडोर मिली थी। उनके रहन-सहन से लेकर देश में उनके द्वारा किए गए कामों के बारे में भारत के हर हिस्से में आज भी चर्चा होती है। उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे अनेक काम किए, जो अविस्मरणीय हैं और मौजूदा समय के नेताओं के लिए आदर्श भी हैं। आज हम आपको लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के कुछ वैसे किस्सों के बारे में बताएंगे, जिन्हें जान कर आप भी हैरान रह जाएंगे कि इतने बड़े ओहदे पर रहने वाला एक आदमी इतना सौम्य कैसे हो सकता है?

खरीदी थी सबसे कीमत की साड़ियां

बताया जाता है कि एक बार देश के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एक दुकान में साड़ी खरीदने गए। दुकान का मालिक शास्त्री जी को अपने दुकान पर देखकर काफी खुश हुआ, उनका आदर सत्कार किया। शास्त्री जी ने कहा कि वे जल्दी में हैं और उन्हें 4-5 साड़ियां चाहिए। प्रधानमंत्री को दुकानदार महंगे-महंगे साड़ियां दिखाने लगा। जिसके बाद शास्त्री जी बोलें कि उन्हें महंगी साड़ियां नहीं चाहिए। उन्होंने कम कीमत वाली साड़ी दिखाने की बात कही। दुकानदार ने कहा, सर आप इन्हें अपना ही समझे, दाम की कोई बात नहीं है। यह तो हमारा सौभाग्य है कि आप यहां पधारे।

शास्त्री जी ने कहा- मैं तो दाम देकर ही लूंगा। मैं जो तुमसे कह रहा हूं तुम उसपर ध्यान दो, कम कीमत की साड़ियां दिखाओ और कीमत बताते जाओ। तब मैनेजर ने सस्ती साड़ियां दिखानी शुरु की। उन्होंने दुकान की सबसे सस्ती साड़ियों को देखने की मांग की। उन्होंने कहा- दुकान में जो सबसे सस्ती साड़ियां हों, वो दिखाओ। मुझे वहीं चाहिए। दुकानदार ने तब जाकर उनके मनमुताबिक साड़ियां निकाली। बताया जाता है कि शास्त्री जी ने उनमें से कुछ साड़ियां चुन ली और कीमत अदा करके चले गए।

पत्नी के पेंशन से कटवा दिए थे 10 रुपये

उनके बारे में यह दूसरा किस्सा भी काफी प्रचलित है। बताया जाता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में एक कार्यकर्ता की भूमिका निभाने वाले लालबहादुर शास्त्री कुछ समय के लिए जेल में भी बंद थे। उनकी पत्नी को हर महीने 50 रुपये पेंशन के तौर पर मिलते थे। जेल में सजा के दौरान एक बार उनकी पत्नी उनसे मिलने आई, उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि पेंशन में मिले पैसों में से वह 10 रुपये बचा लेती है। जिसके बाद लाल बहादुर शास्त्री ने पीपुल्स सोसाइटी के एक अधिकारी को कहकर अपनी बीबी के पेंशन में से 10 रुपये कटवा दिए और उन 10 रुपये को हर महीने किसी जरुरतमंद परिवार को देने की बात कही थी।

पीएम बनने के बाद कार लोन के लिए किया था अप्लाई

बता दें, उच्च आत्म-सम्मान और नैतिकता वाले व्यक्ति लाल बहादुर शास्त्री के पास भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी एक कार नहीं थी। परिवार के सदस्यों से मिलने के बाद उन्होंने आखिरकार अपने सचिव से कार की कीमत का पता लगाने को कहा। कार की कीमत 12,000 रुपये थी और शास्त्री जी के पास 5000 रुपये कम थे। जिसके बाद उन्होंने एक कार ऋण के लिए आवेदन किया जो एक पल में मंजूर किया गया था। फिर उस बैंक अधिकारी को तुरंत बुलाया गया और पूछताछ की गई कि क्या बैंक अन्य ग्राहकों के लिए ऋण स्वीकृत करने में समान रूप से तेज है।

लाल बहादुर शास्त्री के बारे में ऐसे ही और भी कई किस्से प्रचलित हैं। जो यह साबित करते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री होने के बावजूद भी वह सबसे पहले एक बेहतर इंसान थे और एक सामान्य इंसान की तरह ही जीवन व्यतीत करते थे।

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