जब कुंबले के लिए अपनी कप्तानी दांव पर लगा बैठे थे गांगुली

सौरव गांगुली, भारतीय क्रिकेट इतिहास का वो कप्तान जिसने टीम को जीतना सिखाया. सन 2000 में जब मैच फिक्सिंग के काले अध्याय के बाद भारतीय टीम बुरे दौर से गुजर रही थी, सचिन तेंदुलकर स्वास्थय का हवाला देकर कप्तानी छोड़ चुके थे. कोई और खिलाड़ी कप्तानी की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था. ऐसे मुश्किल में समय सौरव गांगुली को कप्तानी सौंपी गयी.

कप्तानी की जिम्मेदारी लेने के बाद सौरव ने नये सिरे से टीम पर काम करना शुरू किया, टीम बनाना शुरू किया. कुछ नये और टैलेंटेड खिलाड़ियों को टीम में जगह दिलाई. कुछ कड़े फैसले लिए और कुछ नये दांव खेले.

गांगुली ने टीम के अंदर मैच जीतने का आत्मविश्वास पैदा किया. विरोधियों से टक्कर लेने का हौसला दिया. उन दिनों ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें ख़ूब स्लेजिंग किया करती थी और भारतीय खिलाड़ी अमूमन शांत ही रहते थे, तब सौरव नें टीम से कहा कि अगर वो एक बोलते हैं तो तुम उन्हें चार सुनाओ.

सौरव बड़े ही जिद्दी स्वभाव के वयक्ति हैं. कप्तानी के दौरान अक्सर वो अपने फैसलों पर अड़ जाया करते थे. गांगुली की एक ऐसे ही जिद्द की कहानी है अनिल कुंबले को लेकर जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

कुंबले के लिए कप्तानी का दांव 

जब 2003-2004 में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के टूर पर जा रही थी, तब सौरव गांगुली ने चयनकर्ताओं से कहा कि उन्हें इस टूर के लिए अनिल कुंबले टीम में चाहिए. चयनकर्ताओं ने कहा की नही…हमने ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए मुरली कार्तिक को सलेक्टि किया है. लेकिन, गांगुली अपने जिद्द पर अड़ गये और कहा की नहीं, उन्हें इस दौरे के लिए अनिल कुंबले ही चाहिए. उसके बाद चयनकर्ताओं ने कहा कि “ठीक है हम तुम्हे अनिल कुंबले देंगे लेकिन इस सीरीज में कुंबले ने अगर विकेट नहीं चटकाए तो उसके बाद हम एक नया कप्तान भी चुन लेंगे”.

लेकिन, सौरव गांगुली का यह दांव सही साबित हुआ. उस दौरे पर कुंबले ने भारत की तरफ से सबसे अधिक विकेट चटकाए. और गांगुली की कप्तानी बच गयी. सौरव ने एक कार्यक्रम में खुद इस वाकये का खुलासा किया था.

गांगुली ने कहा कि कुंबले पिछले 20-25 वर्षों में भारत के सबसे बड़े मैच विजेता रहे हैं. उस दौरे पर चयनकर्ता बाएं हाथ के स्पिनर को टीम में रखना चाहते थे क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई बाएं हाथ के स्पिनर को अच्छी तरह से नहीं खेल पाते हैं. बैठक दो घंटे तक चली. जॉन राइट मेरे पास आए और कहा कि सौरव इसको समाप्त करो और उनकी बात मान लो. गांगुली ने कोच जॉन राइट से कहा कि अगर कुंबले को इस दौरे पर नहीं चुना जाता है तो हो सकता है कि वह दोबारा भारत के लिए नहीं खेल पाएं.

गांगुली कहते है ” मैंने चयनकर्ताओं से कहा कि जब तक अनिल को टीम में नहीं रखा जाता है मैं चयन वाली शीट पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा.’ तब जाकर अनिल कुंबले को टीम में रखा गया. और कुंबले ने उस दौरे में शानदार प्रदर्शन किया.

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Praful Shandilya

praful shandilya is a journalist, columnist and founder of "The Nation First"

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