कहानी: झुमु एक न्याय कथा

झुमु ओ झुमु कहाँ हो? ये लड़की भी न दिन भर इधर से उधर करती रहती है पता नहीं कब बड़ी होगी 16 साल की हो गई है फिर भी बच्चों जैसी हरकतें करने से बाज नहीं आती है… आने दे तुम्हारे बापू को !!!!!!!

झुमु की माँ दुहरी पर खाना बनाते हुए झुमु को आवाज लगा कर बरबरा रही थी लेकिन क्या मजाल की ये लड़की माँ की एक बात भी सुन ले, लेकिन बापू के आतें ही मानो सकदम, जैसे दुनिया भर की सराफत इसी लड़की में आ गई हो

साहब ये कोई मामूली लड़की नहीं थी जितना ही ये अपनी माँ की लाडली थी उतना ही मुहल्लों के लिए मुसीबत… कोई भी दिन ऐसा नहीं होगा जिस दिन ये मोहल्ला के किसी भी बड़े बूढ़े को परेशान न करती हो ,बगल वाले मिश्रा जी तो हर हमेशा भौ चढ़ाये रहते थे क्योकि सबसे ज्यादा नुकसान उन्ही का जो होता था बेचारा सन्डे को ऑफिस से छुट्टी मिलती थी आराम करने के लिए… लेकिन ये बेचारे हर सन्डे को कोस्को बॉल से मार खाते थे हद तो तब होती थी जब झूमू नाटकीय अंदाज में मिश्रा के पैर पर गिर कर माफ़ी मांगती और अपना बॉल लेकर मिश्रा को मुस्कुराते हुए आँख मार कर भाग जाती थी.

इसे भी पढ़ें: बीहड़, मैं और लड़की भाग -2

पता नहीं आज पूरा मोहल्ला शांत लग रहा था एकदम शांत कोई चहल पहल नहीं झुमु के घर के सामने पुलिस का जीप लगी हुई थी माँ दहारे मार-मार कर रो रही थी पापा और मोहल्ले वाले दिलासा दिला रहे थे की अचानक हवा को चीरते हुए एक भीड़ ने पुलिस को चारो तरफ़ से घेर लिया एक छन तो सारे पुलिस वाले सकपका गए लेकिन फिर भीड़ को शांत करने में जुट गए.

आज फिर हैवानियत की सारी हदें पार हुई थी नाबालिक लड़की झुमु का रेप हुआ था साहब रेप! और दरिंदों ने रेप कर के मार डाला था झुमु को. इसी लिए उसके घर के सामने पुलिस और भीड़ इक्कठी थी पुरे मोहल्ले में मातम छाया हुआ था  भले मुहल्ले वाले को परेशान करती थी लड़की लेकिन सभी प्यार करतें थे आज पुरे मोहल्ले में चूल्हा नहीं जला था बेचारे मिश्रा जी ये कह कर रो रहे थे की अब हर सन्डे कौन बॉल मरेगा मुझे!

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चूकी थी दरिंदो ने सारी हदे पार कर दी थी झुमु के साथ, पुरे देश में प्रोटेस्ट चल रहा था, कैंडल मार्च निकाले जा रहे थे, पूरा सोशल मीडिया जस्टिस फॉर झुमु से पटा पड़ा था, मीडिया को टीआरपी मिल रही थी और लोगों को पल पल की खबर.

आज इस घटना को दस दिन हो गए थे पुलिस अभी तक कुछ नहीं कर पाई थी कई सवाल आप के जेहन में घूम रहे होंगे. क्या वारदात को होतें हुए किसी ने भी नहीं देखा , अपहर्ता इतना चालाक कैसे हो सकता है! क्या ऐसा कभी हुआ है की कोई भी जुर्मी एक भी सुराग न छोर जाए लेकिन पुलिस के अनुसार यहाँ ऐसा ही हुआ था.

झुमु के बापू दहाड़े मार-मार कर झुमु के फोटो के सामने रो रहे थे बेटी शायद मै तुझे न्याय नहीं दिला पाउँगा क्या हुआ प्रोटेस्ट कर के, अनसन कर के, कैंडल मार्च निकाल कर के कुछ नहीं कुछ नहीं हनाआआआआआआअ!!!!!!

पुरे 55 साल हो गए थे झुमु की घटना को अभी तक झुमु को न्याय नहीं मिल पाया था ये बेचारा बुड्ढा भी मरने के कगार पर था कब टपक जाए कोई ठीक नहीं लेकिन झुमु को न्याय दिलवाने की कसम इसे मरने नहीं देता, कहतें है कानून के हाथ बहुत लम्बे होतें है लेकिन यहाँ तो कानून अपाहिज नज़र आ रही थी.

रोज की भांति आज भी झुमु के बापू पुलिस स्टेशन में हाजरी लगाने जा रहे थे की अचानक तेजी से एक ट्रक आई और सीधे खचाक्क फिर सुनसान रास्ता कहीं कोई नहीं चैप्टर क्लोज

नोट: आज सैकड़ो ऐसी ऐसी घटनाएँ घटती है कई झुमु रेप की शिकार होती है, कई बाप न्याय दिलवाने के लिए कुर्बान हो जाते है और देश में न्याय दिलाने के लिए सारी रस्मे भी अदा की जाती है, लेकिन क्या सभी को न्याय मिल पाती है ??  अब आप को क्या बताना आप लोग तो ख़ुद समझदार हैं ! लेकिन हाँ इस कहानी को पढ़ कर एक गहरा चिंतन जरुर कीजिएगा.

Facebook Comments

Pushpam Savarn

pushpam is a content creator and a journalist

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *