वनडे में पांड्या,जडेजा, शार्दुल रहे प्लस प्वाइंट, बॉलर्स नें लुटिया डुबोई

टीम इंडिया जब ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए रवाना हुई तो इससे काफी उम्मीदें थी। टीम के लगभग सभी सदस्यों नें आईपीएल में अपनी-अपनी टीमों के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था। इस आधार पर इनका टीम में चयन भी किया गया लेकिन जैसे ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया अपना पहला मैच खेलने उतरी, लगा ही नहीं कि किसी भी गेंदबाज में ऑस्ट्रेलिया का कोई विकेट लेने का माद्दा हो।

आश्चर्यजनक बात यह रही कि जिस टीम में जसप्रीत बुमराह‌ और मोहम्मद शमी जैसे वर्ल्डक्लास पेसर्स हों, वह लगातार दो मैचों में पावरप्ले के दौरान एक विकेट न ले पाई। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम शुरू से फ्रंटफुट पर थी और एक एक विकेट लिए‌ टीम इंडिया को पानी पिलाया। भुवनेश्वर कुमार की कमी निश्चित तौर पर खली जो शुरूआती ओवर्स में विकेट निकालते हैं।

चहल और जडेजा प्रभावहीन नजर आए वहीं नवदीप सैनी की जमकर पिटाई हुई। तीसरे ओडीआई में डेब्यू कर रहे टी नटराजन नें इस सीरीज में पावरप्ले का पहला और एकमात्र विकेट लिया। हालांकि वह भी महंगे साबित हुए। किसी भी मैच में टॉस काफी महत्वपूर्ण होता है और हुआ भी ऐसा ही। ऑस्ट्रेलिया ने अपने होम ग्राउंड पर टॉस जीता, बल्लेबाजी करने का फैसला.. बस यहीं से मैच‌ और सीरीज की पटकथा लगभग लिखी जा चुकी थी। अंतिम मैच में कप्तान विराट‌‌ कोहली नें टॉस जीता तो एक सांत्वनापूर्ण जीत मिली।

पहले दो मैचों में तो भारतीय गेंदबाजों को डेविड वॉर्नर और एरोन फिंच की जोड़ी को तोड़ना मुश्किल हुआ। एक बार इस जोड़ी को तोड़ भी लिया तो फिर स्टीवन स्मिथ चट्टान की तरह खड़े नजर आए। उसके बाद मार्नस लाबुशेन ने रही सही कसर पूरी कर दी। डेथ ओवर्स के दौरान ग्लेन मैक्सवेल का बल्ला चलने लगा जो आईपीएल में पूरी तरह से खामोश था।

जब आपके सामने 350 से ऊपर का टारगेट हो तो चाहे कितनी भी बढ़िया बैटिंग आक्रमण क्यों ना हो टीम की व्हाट लग जाती है। खासकर जब बड़े चेज के माहिर रोहित टीम में न हो। इसका मतलब यह नहीं कि रोहित अकेले जीता देते लेकिन उनका रहना फर्क जरूर डालता। पहले मैच में हेजलवुड और एडम जांपा ने भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं दूसरे मैच में इन दोनों को पैट कमिंस का साथ भी मिल‌ गया। बैटिंग में धवन नें पहले मैच में अच्छा खेला तो दूसरे में कोहली और राहुल के अलावा बाकी बल्लेबाज अच्छी शुरूआत को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए।

तीन मैचों की वनडे सीरीज का प्लस प्वाइंट हार्दिक पांड्या की बैटिंग रही जिन्होंने अपने स्वभाव के अनुसार तो खेला हीं, लेकिन साथ में जब जरूरत थी तो समझदारी और संयम के साथ भी बैटिंग की। उनका स्कोर 90, 28 और 92 नॉटआउट रहा जिसमें तीसरे मैच की गेम चेंजिंग पारी प्रमुख रही।

रविंद्र जडेजा को एक बढ़िया बैट्समैन का दर्जा नहीं मिलता लेकिन लगातार अच्छी पारियाँ खेलकर उन्होंने प्रूव करके दिखाया है। तीसरे और आखिरी मैच में जब टीम इंडिया 152-5 थी तो जडेजा (66*) नें पांड्या के साथ 150 रनों की नाबाद पार्टनरशिप कर एक चैलेंजिंग टोटल तक पहुंचाया। पहले हीं सीरीज जीत चुकी ऑस्ट्रेलिया की टीम नें अपने बल्लेबाजी और गेंदबाजी में कई बदलाव किए और उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। शार्दुल ठाकुर नें बेहतरीन गेंदबाजी कर दिखाया कि चेन्नई के लिए लगातार विकेट निकालना केवल तुक्का नहीं था। अब सारी निगाहें 4 दिसंबर से शुरू हो रहे टी20 सीरीज पर टिकी है जिसमें टीम इंडिया ज्यादा अच्छा कर सकती है।

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Ankush M Thakur

Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator

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