दिल्ली की रूह कंपाने के लिए यह आंकड़ा काफी है

अगर किसी पैरेंट्स को पता चले की उनका बच्चा ड्रग्स एडिक्ट है, नसीले पदार्थो का सेवन करता है तो शायद ही कोई ऐसा माँ बाप होंगे जिनके पैरों तले जमीन न खिसके लेकिन ये भयावह सत्य दिल्ली शहर की है जहां लगभग 90 प्रतिशत बच्चे नासिले पदार्थों का सेवन करते हैं।

लेकिन aiims की एक रिपोर्ट के अनुसार इन बच्चों के पैरेंट्स भी नसीले पदार्थों का सेवन करते हैं और बच्चे उन्हीं से प्रेरित होते हैं । सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने लोकसभा में कहा है की दिल्ली में कुछ महीनों के भीतर ही नसीले पदार्थों का  सेवन करने वाले बच्चों के करीब 46500 केस सामने आया है जबकि लगभग 22 हज़ार मामले गांजा, सिगरेट , बीड़ी, तम्बाकू इंहेलेंट जैसे पदार्थों का सेवन करते हैं ।

aiims के एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 29 फीसदी बच्चे अपने दोस्तों के साथ नासा करते हैं तो 19 फीसदी सिक्योसिटी और 6 फीसदी बच्चे खराब मौसम से निपटने के लिए नसीले पदार्थो का सेवन करते हैं जिसमें नार्थ दिल्ली मे 24 प्रतिशत, साउथ दिल्ली में 16 प्रतिशत और सेंट्रल दिल्ली में 21 प्रतिशत बच्चे नसीले पदार्थों का सेवन करते हैं ।

साथ ही उस रिपोर्ट में कहा गया है कि 420 मामले अफीम के, 840 केस हीरोइन के , फार्मास्यूटिकल ओपीओयड 210 के सामने आए हैं NCRB के 2015के आंकड़ो के अनुसार मौत के 34 मामले ऐसे सामने आये हैं जिनमें लगभग बच्चो की मौत ड्रग्स सेवन से हुई है वहीं अन्य राज्यों में भी यह आंकड़ा इससे थोड़े ही कम है ।दिल्ली से सटे राज्य जैसे पंजाब हरियाणा और up क कुछ शहर जो दिल्ली से सटा है उसके हालत भी बिलकुल दिल्ली के जैसे हीं  हैं फिर भी यहाँ की सरकारें इन नसीले पदार्थों पर बैन नहीं लगाती है आप सोच सकते हैं की देश की क्या हालत है और देश का भविष्य किस रस्ते पर है इसमें जितना सरकर दोषी है उससे कहीं ज़यादा पैरेंट्स दोषी हैं ।

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Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

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