गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा पर क्या बोली राजनीतिक पार्टियां?

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 2 महीने से दिल्ली के बॉर्डरों पर प्रदर्शन चल रहा है। बीते दिन मंगलवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस कानून के विरोध में किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाला था। ट्रैक्टर परेड निकालने के कुछ ही देर बाद हिंसा, तोड़फोड़ और अन्य अप्रिय घटनाएं सामने आई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाल किले पर खालसा पंथ का झंडा भी फहरा दिया। हालांकि, लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने वाले पंजाब के दीप सिद्धू को एनआईए ने नोटिस दिया है। किसान आंदोलन के कई नेता दीप सिद्धू को सरकार का एजेंट भी बता रहे हैं। परेड के दौरान हुई हिंसा का सभी राजनीतिक पार्टियों ने निंदा की है।

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कांग्रेस ने की हिंसा की निंदा

देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा और अप्रिय घटनाओं से पार्टी और देश को दुख पहुंचा है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। चोट किसी को भी लगे, नुकसान हमारे देश का ही होगा। देशहित के लिए कृषि-विरोधी कानून वापस लो!’

वहीं कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी को ‘राजहठ’ छोड़ ‘राजधर्म’ के मार्ग पर चलना होगा। यही 72वें गणतंत्र दिवस का सही संदेश है। बगैर किसी देरी के तीनों खेती विरोधी काले कानून वापस लेने होंगे। यही देश के 62 करोड़ अन्नदाताओं की पुकार भी है और हुंकार भी।‘

AAP ने केंद्र सरकार को घेरा

आम आदमी पार्टी ने गणतंत्र दिवस के दिन हुई इस घटना की निंदा की। AAP ने हालात को इस हद तक बिगड़ने देने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया। पार्टी की ओर से कहा गया कि हिंसा ने आंदोलन को निश्चित रुप से कमजोर किया है, जो शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से चल रहा था।

एलजेपी ने की निंदा

वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों के इस व्यवहार की निंदा की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिस तरीके से उपद्रवी तत्वों द्वारा आंदोलन के आड़ में अपराध किया गया वह किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। लोक जनशक्ति पार्टी इस प्रकार के व्यवहार की आलोचना करती है।‘

शरद पवार ने दी केंद्र सरकार को सलाह

एनसीपी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुई इस हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय राजधानी में जो कुछ हुआ, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन उन कारणों को भी नरअंदाज नहीं किया जा सकता जिनकी वजह से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई।

शरद पवार ने आगे कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के मुद्दे पर किसानों से वार्ता करे और मुद्दे पर अपना ‘‘अड़ियल रवैया’’ छोड़े। पवार ने पत्रकारों से कहा कि यदि केंद्र ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया तो पंजाब में अशांति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए मोदी सरकार को यह ‘पाप’ नहीं करना चाहिए।

योगेंद्र यादव ने ली जिम्मेदारी

इस मामले पर स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों के ट्रैक्टर परेड में जो कुछ हुआ, उससे वह शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं और इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन का हिस्सा होने के नाते मैं शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं और घटनाक्रम के लिये जिम्मेदारी लेता हूं।’

पात्रा ने बताया उग्रवादी

इस मामले को लेकर बीजेपी के नेता किसान नेता और किसान आंदोलन पर हमलावर है। बीजेपी के फायर ब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, जिनको हम इतने दिनों से अन्नदाता कह रहें थे, वो आज उग्रवादी साबित हुए। अन्नदाताओं को बदनाम न करो, उग्रवादियों को उग्रवादी ही बुलाओ! भाजपा प्रवक्ता ने इसके साथ ही एक वीडियो साझा किया जिसमें एक प्रदर्शनकारी कथित तौर पर तिरंगा झंडा फेंकते हुए देखा जा रहा है।

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