कौन है प्रवीण तोगड़िया और क्यों बना वाजपेयी और मोदी का धुरविरोधी

प्रवीण तोगड़िया का जन्म 1956 में गुजरात के अमरेली में एक किसान परिवार हुआ था और इनकी शिक्षा अहमदाबाद में पूरी हुई । कहा जाता है कि जब ये छोटे थे तब इन्हें सोमनाथ मंदिर जाने का अवसर प्राप्त हुआ लेकिन जब इन्होंने उस मंदिर के टूटे हुए अवशेषों को देखने के बाद उन्हें हिन्दुत्व के प्रति अधिक लगाव हो गया और उनके जीवन की दिशा ही बदल गई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से तोगड़िया अपने युवाकाल से हीं जुड़ गए थे जिस कारण उन्हें महज 22 साल की उम्र में ही स्वयंसेवकों का मुख्य मार्गदर्शक चुन लिया गया और साथ हीं इन्होंने अपनी डॉक्टरी भी जारी रखी । 1980 के बीच तोगड़िया की दोस्ती नरेन्द्र मोदी से हो गई, चुकी दोनों की विचारधारा काफी हद तक मिलती जूलती थी जिस कारण धीरे धीरे इनकी दोस्ती प्रगाढ़ होती चली गई ।

1985 में जब अहमदाबाद में साम्प्रदायिक रंग चढ़ने लगा तब तोगड़िया को विश्व हिंदू परिषद की जिम्मेदारी दी गई । डॉक्टर होने के बावजूद भी तोगड़िया ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाया साथ हीं उन्हें परिषद और संघ दोनों का मार्गदर्शन मिलता रहा । लेकिन इन दोनों की दोस्ती के बीच सत्ता आ गई और अब मकसद मात्र कुर्सी हासिल करना भर था । तोगड़िया चाहते थे कि गुजरात मे बीजेपी की सरकार बने जिस कारण उन्होंने बीजेपी के लिए दिल खोलकर प्रचार प्रसार करना शुरु किया और जब गुजरात और केन्द्र में बीजेपी की सरकार बनी तो तोगड़िया को लगने लगा कि बीजेपी राममंदिर और हिन्दुत्व के एजेंडे से भटक गई है और इसी के साथ धीरे धीरे दोनों के रिश्तों  में खटास आना शुरू हो गई ।

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अब वो वक़्त आ गया जब बीजेपी के प्रति तोगड़िया के तेवर तल्ख होने लगा और बीजेपी के खिलाफ तोगड़िया ने आग उगलना शुरु कर दिया । इसका एक और कारण था कि तोगड़िया भी कहीं न कहीं खुद को देश के प्रधानमंत्री के रूप में देखते थे । रजत शर्मा के शो आपकी अदालत में तोगड़िया ने कहा था कि अगर मेरे रिमोट कंट्रोल से सब कुछ चलता है तो इस हिसाब से मुझे देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए । यह सौभाग्य की बात है कि मैं कभी देश का प्रधानमंत्री नही बनना चाहा जिस पर रजत शर्मा ने कहा कि क्या आप चुनाव लड़ कर अपनी सरकार बनाएंगे तो तोगड़िया ने जवाब दिया, हां क्यों नहीं ! इससे साफ दिख रहा था कि तोगड़िया के मन मे प्रधानमंत्री बनने की लालसा थी लेकिन उनके साथ के ही मोदी कुर्सी तक पहुँच गए और ये पीछे रह गए ।

2002 में शरत प्रधान  ने जब एक इंटरव्यू में  तोगड़िया से पूछा कि मुलायम सिंह की छवि वाजयेपी और आडवाणी में देखते हैं जिस पर उन्होंने ने कहा था कि हम मुलायम सिंह की तुलना वाजपेयी और आडवाणी से नही कर सकते लेकिन मुझे ये कहने में कोई संकोच नही की वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बनने के लायक नहीं हैं और अटल, आडवाणी पर हमला करने के बाद कभी भी तोगड़िया ने कोई सफाई नही दी और हमेशा यही कहते रहे कि जिस राममंदिर और हिन्दू परिषद के बदौलत उन्हें कुर्सी मिली वो इसी मुद्दे को भूल गए ।

इसी बीच यानी 2002 मे अब वो दिन भी आ गया जब विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी के बीच हो रहे घमासान अब सब के सामने खुल कर आने लगा और अटल, आडवाणी के जोड़ी पर  जोरदार हमला करते हुए तोगड़िया ने कहा कि देश को जॉर्ज बुश और शेरॉन जैसे नेताओं की ज़रूरत है जो आतंकवाद के खिलाफ कठोर फैसला ले सकें और देश की सरकार इस तरह के फैसले लेने में असफल हो रही है । तोगड़िया के बयानबाजी से साफ पता चलता है कि वाजपेयी से 36 का आंकड़ा रहा था कहा जाता है कि वाजपेयी के 6 साल के शासनकाल में अगर किसी ने उनपर सबसे ज़्यादा  निशाना साधा तो वो थे तोगड़िया । बीजेपी का कोई भी नेता हिंदूवादी विचारधारा से थोड़ा भी इधर उधर हुआ तो तोगड़िया ने उनकी क्लास जम कर लगाई ।

लेकिन अब ऐसा समय आ गया जब  तोगड़िया की नाव डूबने लगी क्योंकि 2007 और 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिली  जिससे तोगड़िया को जोरदार झटका लगा, तो उन्होंने 2013 में ऐलान किया कि अगले 2 वर्षों में गुजरात के 18 गांवों में विश्व हिंदू परिषद की पैठ को मजबूत करेंगे ।

तोगड़िया ने अटल,आडवाणी के बाद मोदी के नीतियों पर भी जमकर निशाना साधना सुरु किया । उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों की शिक्षा का खर्च उठाती है ठीक उसी तरह हिंदुओं की जिम्मेदारी भी उसी की है । हज पर सरकार की ओर से खर्च की जाने वाली रकम से लेकर मुस्लिमों के यूनिफॉर्म और फैमिली पॉलिसी तक कि बातों को उन्होंने दोहराया जिस कारण मोदी के छवि पर भी सवाल उठने लगा ।

वक्त तो बदला लेकिन तोगड़िया का तेवर नहीं ! और एक बार फिर मंगलवार को तोगड़िया ने  आरोप लगाया कि बीजेपी  उनकी आवाज को दबाना चाहती है और उन्हें पुलिस मुठभेड़ में मार देने की कोशिश की गई थी । दरअसल सोमवार को विश्व हिन्दू परिषद के नेता तोगड़िया कुछ समय के लिए लापता हो गए थे । उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में ये आरोप लगाया कि जिस तरह से उन्होंने केंद्र के आधीन आईबी पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया उससे सीधा निशाना मोदी सरकार तक जा रही है |और अब एक बार फिर दोनों नेताओं की  चर्चा जोरों पर है ।

नोट -: ऐसे ही रोचक तथ्यों पर की गई एनालिसिस को पढ़ने के लिए बने रहिए द नेशन फर्स्ट के साथ

 

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Rahul Tiwari

राहुल तिवारी 2 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो इंडिया न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं.

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