युवराज सिंह की बढ़ी मुश्किलें…दर्ज हुआ मुकदमा, जानिए क्या है पूरा मामला ?

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी युवराज सिंह एक बार फिर विवादों में फंसते हुए दिख रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 8 महीने पहले युवराज सिंह ने युजवेंद्र चहल के लिए ‘जातीय टिप्पणी’ की थी, जिसके लिए उनके खिलाफ हरियाणा में अब जाकर अचानक एफआईआर दर्ज की है।

दरअसल युवराज सिंह ने स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा के साथ इंस्टाग्राम लाइव चैट में बात करते दौरान युजवेंद्र चहल पर जातिय टिप्पणी की थी। हालांकि युवराज ने जिस शब्द का इस्तेमाल किया वह दलित समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्द था। लेकिन बाद में अपनी गलती का अहसास होने के बाद क्रिकेटर युवराज सिंह ने सोशल मीडिया पर इसके लिए खेद जताते हुए माफी भी मांग ली थी।

बता दें कि युवराज का यह कॉमेंट तब आया था, जब देश में लॉकडाउन लगा हुआ था। दुनिया भर की गतिविधियां ठप्प पड़ी थीं, ऐसे वक्त में दुनिया भर के स्टार्स और नामचीन हस्तियाँ अपने-अपने फैन्स के मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया पर खास चैट सेशन कर रहे थे।

ऐसे ही एक चैट सेशन में इंस्टाग्राम पर युवराज सिंह और रोहित शर्मा के बीच हो रही बातचीत के दौरान युवराह सिंह ने कुछ ऐसी टिपण्णी कर दी जिसे लेकर आज इतना बवाल मचा हुआ है दरअसल, बीते साल जून माह में युवराज सिंह भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा के साथ लाइव वेब चैट कर रहे थे तभी उन्होंने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया था। इंस्टाग्राम पर लाइव चैट में युवराज और रोहित बात कर रहे थे।

इस दौरान युवराज ने कहा कि कुलदीप भी ऑनलाइन आ गया। उधर से रोहित शर्मा बोलते हैं कि कुलदीप ऑनलाइन है, ये सब ऑनलाइन हैं, ये सब ऐसे ही बैठे हुए हैं… इतने में युवराज सिंह बोलते हैं कि ये भंगी लोगों को कोई काम नहीं है यूज़ी को. यूज़ी को देखा क्‍या फोटो डाला है अपनी फैमिली के साथ। मैंने उसको यही बोला कि अपने बाप को नचा रहा है, तू पागल तो नहीं है, यह सुनकर युवराज सिंह हंस देते हैं

किसने किया FIR, क्या है पुरा मामला ?

खबरों के मुताबिक हरियाणा के हिसार जिले के एक वकील ने युवराज सिंह की इस आपत्तिजनक टिपण्णी को दलितों का अपमान बताते हुए उनके खिलाफ तभी पुलिस को शिकायत की थी। इस शिकायत पर कार्यवाही करते हुए हरियाणा पुलिस ने अब जाकर 8 महीने बाद एफआईआर दर्ज की है। हिसार के हांसी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई इस एफआईआर में युवराज सिंह पर आईपीसी की धारा 153, 153A, 295, 505 के अलावा सेक्शन SC/ST Act के सेक्शन 3 (1) (r) और 3 (1) (s) के तहत यह एफआईआर दर्ज की है।

क्या है SC / ST एक्ट ?

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग सदियों से शोषण और अत्याचार का सामना कर रहे थें और मौजूदा समय में भी ऐसी कई घटनाएँ देखी जा सकती हैं, जहाँ किसी व्यक्ति का उत्पीड़न केवल इसलिये किया जाता है क्योंकि वह किसी एक जाति विशिष्ट से संबंधित है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1989 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम SC /ST ACT पारित किया था। इस कानून के अंतर्गत दलित समाज के लिए निम्न प्रावधान निर्धारित हैं-

-SC/ST ACT 1989 में अलग-अलग तरह के ऐसे 22 कृत्यों को अपराध के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है जिनके कारण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित किसी व्यक्ति को अपमान का सामना करना पड़ता हो अथवा उसके स्वाभिमान या सम्मान को ठेस पहुँचती हो।

-इसके अंतर्गत किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव करना, कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग और किसी व्यक्ति के आर्थिक, लोकतांत्रिक एवं सामाजिक अधिकारों का उल्लंघन करना शामिल है।

-इस तरह SC/ST ACT के माध्यम से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित लोगों को सामाजिक विकलांगता जैसे- किसी स्थान पर जाने से रोकना, द्वेषपूर्ण तरीके से अपमानित करना और आर्थिक शोषण आदि से सुरक्षा प्रदान करना है।

-इस कानून के तहत महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में पीड़ित को राहत राशि देने और अलग से मेडिकल जाँच की भी व्यवस्था है।

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